Thursday, 1 December 2011

खुदरा में विदेशी निवेश क्यों ?

प्रिय भाइयो एवम बहनों,
भारत एक कृषि प्रधान देश है यहाँ  के लोगो की रोज की ज़रूरते खाने- पीने, पहनने आदि सब कुछ कृषि एवं कृषि से उत्पन्न चीजो से होती है यहाँ पर चावल, दाल , गेंहू , तिलहन आदि सब कुछ प्रचुर मात्र में होता है आजादी को मिले ६४ साल हो चुके है लेकिन आज भी उन चीजो का भंडारी करण सही तरीके से नहीं हो पता जो चीजे एकबार भंडारी करण के लिए जाती है तो या तो वही  पर सड़ जाती है या तो वहा  से निकलती है तो खाने योग्य नहीं होती क्योकि उनका भंडारी करण सही तरह नहीं किया गया होता, उसके बाद आते है उनका वितरण मित्रो आप लोग न्यू देखते होंगे की जब बिहार या कही अन्य जगह पर बाढ़ आती है तो वहा पर सही तरह से लोगो को राशन नहीं पहुच पाता मित्रो ऐसा इस लिए है की ६४ साल के आजादी के बाद भी अभी तक सब्जियों एवं अनाजो का न तो सही तरह से भण्डारण की व्यवस्था बनी नहीं उसके वितरण की, मित्रो सबसे पहले तो सरकार को खुद भारतीयों को बढावा देना चाहिए की वो शीतगृह की जरुरत के अनुसार स्थापना एवं वितरण/यातायात की व्यवस्था सुधारे सब कुछ यही ठीक हो सकता है बशर्ते की ऐसी व्यवस्था बनाई जाये  लोगो को खुद अपने आप रोजगार मिल जायेगा मित्रो सोचो  अगर विदेशी कंपनिया भारत आएगी तो क्या वो भारतीय मुद्रा विदेश नहीं ले जाएँगी  तो मित्रो जरा सोचिये की जो सरकार ६४ साल से शासन कर रही है आजतक नहीं कर पाई तो वो विदेशी (वाल्ल्मार्ट  वगैरह ) कैसे कर सकते है मित्रो ये सरकार की चाल है लोगो को काले धन के मुद्दे से भटकाने का और विदेशी कंपनियों से मिले पारितोषिक को छुपाने का (सुझाव आमंत्रित है )

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