Saturday, 31 December 2011

भारतीयों की मानसिक गुलामी भाग १

प्रिय मित्रो,

आप लोग जाने या अनजाने में विदेशी कंपनियों को यहाँ पर पैर पसारने में कितना सहयोग कर रहे है शायद नहीं पता और यह सहयोग ही आज आप लोगो को स्वावलंबी बनाने में बाधक बन रहा है मित्रो कोई भी देश तब  तक अपनी उन्नति नहीं कर सकता जब तक वो खुद अपने देश में खुद की उत्पादित वस्तुओ का प्रयोग और बढावा ना दे, कोई भी भाषा तब तक अपनी पहचान नहीं बना सकती जब तक खुद वही के लोग उसको ना अपनाये कोई भी संस्कृति तब  तक ही अपनी पहचान बनाये रख सकती है जब तक उसका दिल से अनुसरण किया जाता है , आज सरकार की गलत नीतियों और व्यवस्था के कारण ही हम लोग पिछड़ते जा रहे है और दूसरो पर निर्भर होते जा रहे है जरा रुकिए और अपने दिनचर्या पर नजर दौडाइए जो आलू ४ रूपये की कीमत का होता है उसको  पेप्सिको आप से ६ रूपये में  खरीदती है और मैंन पॉवर आप का प्रयोग किया प्रोसस्सिंग आप के देश में किया और वही आलू आप को ५०० रूपये चिप्स बनाकर बेच दिया और सरकार कहती है की विदेशी कंपनियों को आने से किसानो को वाजिब दाम मिला है वही ४ के बजाये ६ रूपये में धन्य हो सरकार धन्य है ६४ साल का शासन आगे देखिये पेप्सी ने पानी आप के देश  का लिया चीनी आप का लिया मैन पॉवर आप का लिया और वही पानी ३० रूपये पर  लीटर आप को बेच दिया जहर बना कर, की आप पियो और ये पेय पदार्थ आप के शरीर कैलिशियम के साथ क्रिया करके आप के शरीर को नुकसान पहुचाता,  मित्रो सबसे ज्यादा आप लोग भी इन विदेशी कंपनियों को यहाँ पैर ज़माने में योगदान करते हो जैसे जरा नजर दौडाइए अपने दिनचर्या पर जब आप सुबह उठते है तो सबसे पहले जो विदेशी चीज उपयोग करते है वो ये है  क्लोज अप, पेप्सोडेंट, कोलगेट, कोलगेट मौथ वाश, नीम एक्टिवे (हेन्कल) आदि, जबकि आप इनके जगह ये भी तो प्रयोग कर सकते है डाबर रेड टूथ पेस्ट,मेस्वाक, प्रोमिस, लाल दन्त मंजन, बबूल मिंट फ्रेश, दंत कांति, बैद्यनाथ दंत मंजन,अजंता टूथ पेस्ट, पतंजलि टूथ ब्रुश, क्लास्सीक आदि, उसे बाद सेविंग करते है तो जो विदेशी प्रयोग में लाते है वो ये है जिल्लत सविंग क्रीम, पल्मोलिव सविंग क्रीम, ओल्ड स्पाइस, डेनिम आदि जबकि आप इनकी जगह ये भी तो प्रयोग कर सकते है डॉक्टर एक्स सविंग जेल, अलोए वेरा आदि, जब आप नहाने जाते है तो आप विदेशी जो प्रयोग में लाते है वो ये है विवेल , लक्स, लाइफ बॉय , ब्रीज , एमवाय, फा सोप , मार्गो नीम, जबकि इनके बजाये आप ये भी प्रयोग में ला सकते है निरमा सोप , मेदिमिक्स , माय सोप, गोदरेज सींथल, गोदरेज नो. १, संतूर आदि, अभी आप स्नानघर में ही है और लाखो रूपये विदेको दे दिए अब संपू पर चलते है जो आप लोग विदेशियों का प्रयोग करते है पैंटीन प्रो वी , हेड एंड शोल्डर , फिअमा , क्लिनिक प्लस, डव, ऍम वे क्लिनिक आल क्लिएर आदि इनकी जगह आप ये भी तो प्रयोग कर सकते है नील हर्बल , डाबर वाटिका, चिक संपू, केश निहार, हेअर एंड केअर आदि बाकी अगले अंक में

Thursday, 1 December 2011

खुदरा में विदेशी निवेश क्यों ?

प्रिय भाइयो एवम बहनों,
भारत एक कृषि प्रधान देश है यहाँ  के लोगो की रोज की ज़रूरते खाने- पीने, पहनने आदि सब कुछ कृषि एवं कृषि से उत्पन्न चीजो से होती है यहाँ पर चावल, दाल , गेंहू , तिलहन आदि सब कुछ प्रचुर मात्र में होता है आजादी को मिले ६४ साल हो चुके है लेकिन आज भी उन चीजो का भंडारी करण सही तरीके से नहीं हो पता जो चीजे एकबार भंडारी करण के लिए जाती है तो या तो वही  पर सड़ जाती है या तो वहा  से निकलती है तो खाने योग्य नहीं होती क्योकि उनका भंडारी करण सही तरह नहीं किया गया होता, उसके बाद आते है उनका वितरण मित्रो आप लोग न्यू देखते होंगे की जब बिहार या कही अन्य जगह पर बाढ़ आती है तो वहा पर सही तरह से लोगो को राशन नहीं पहुच पाता मित्रो ऐसा इस लिए है की ६४ साल के आजादी के बाद भी अभी तक सब्जियों एवं अनाजो का न तो सही तरह से भण्डारण की व्यवस्था बनी नहीं उसके वितरण की, मित्रो सबसे पहले तो सरकार को खुद भारतीयों को बढावा देना चाहिए की वो शीतगृह की जरुरत के अनुसार स्थापना एवं वितरण/यातायात की व्यवस्था सुधारे सब कुछ यही ठीक हो सकता है बशर्ते की ऐसी व्यवस्था बनाई जाये  लोगो को खुद अपने आप रोजगार मिल जायेगा मित्रो सोचो  अगर विदेशी कंपनिया भारत आएगी तो क्या वो भारतीय मुद्रा विदेश नहीं ले जाएँगी  तो मित्रो जरा सोचिये की जो सरकार ६४ साल से शासन कर रही है आजतक नहीं कर पाई तो वो विदेशी (वाल्ल्मार्ट  वगैरह ) कैसे कर सकते है मित्रो ये सरकार की चाल है लोगो को काले धन के मुद्दे से भटकाने का और विदेशी कंपनियों से मिले पारितोषिक को छुपाने का (सुझाव आमंत्रित है )